छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-11 फणिनाग वंश )

chhattisgarh history notes in hindi –  about funi naag vansh कवर्धा का फणिनाग वंश छत्तीसगढ़ की एक शाखा फणिनाग वंश ने 9 वीं से 15वीं सदी तक कवर्धा के आस पास शासन किया । ये अपनी उत्पत्ति अहि एवं जतकर्ण ऋषि की कन्या मिथिला से मानते है, जिस वजह से इस वंश को अहि-मिथिला वंश…


भारत का संविधान (राष्ट्रपति) [constitution of india(president)]

राष्ट्रपति (अनुच्छेद 52-62, 71-73,123) संसदीय प्रणाली में दो तरह के प्रमुख्य होते हैं – राज्यों का प्रमुख एवं शासन का प्रमुख |  भारत में संसदीय प्रणाली अपनायी गई है, अतः यहाँ भी दो तरह के प्रधान है| राष्ट्रपति राज्यों का प्रधान है तथा प्रधानमंत्री शासन का | भारतीय संविधान के अनुसार 52 में कहा गया…


जानिये छत्तीसगढ़ के खजुराहो भोरमदेव के बारे में

chhattisgarh geography notes in hindi – about bhoramdev temple भोरमदेव का मंदिर भगवन शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है जो भोरमदेव छत्तीसगढ़ में स्थित है| इसमें चार मंदिरों का एक समूह शामिल है जो ईंट से बने नवीनतम मंदिरों से एक है| छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाने वाला भोरमदेव पर्यटकों का खास आर्कषण का स्थल…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-10 नागवंश )

Chhattisgarh history notes –  about naag vansh छत्तीसगढ़ में नागवंश की दो शाखाओं का उल्लेख मिलता है :- कवर्धा में फणिनाग वंश  बस्तर में छिंदकनाग वंश  बस्तर में छिंदकनाग वंश :- बस्तर का प्राचीन नाम “चक्रकूट” तो कई उसेे “भ्रमरकूट” कहते हैं।यहाँ नागवंशियों का शासन था। नागवंशी शासकों को सिदवंशी भी कहा जाता था। चक्रकोट…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-09 सोमवंश )

Chhattisgarh history notes –  about som vansh सोम वंश का शासन छत्तीसगढ़ के कांकेर राज्य में 1125 ई. से 1344 ई. तक था। सिंहराज इस वंश के संस्थापक थे। कुछ इतिहास कार द्वारा माना जाता है की सोम वंश पाण्डु वंश की एक शाखा थी, जो कालांतर में सोमवंश के रूप में कांकेर में स्थापित…


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