छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-11 फणिनाग वंश )

chhattisgarh history notes in hindi –  about funi naag vansh कवर्धा का फणिनाग वंश छत्तीसगढ़ की एक शाखा फणिनाग वंश ने 9 वीं से 15वीं सदी तक कवर्धा के आस पास शासन किया । ये अपनी उत्पत्ति अहि एवं जतकर्ण ऋषि की कन्या मिथिला से मानते है, जिस वजह से इस वंश को अहि-मिथिला वंश…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-5 राजर्षि तुल्य वंश )

Chhattisgarh history notes – about rajshree tulya vansh राजर्षि तुल्य वंश ( सुर वंश ):-  राजर्षि तुल्य वंश ने दक्षिण कोशल पर 5 वीं 6 वीं शताब्दी तक शासन किया था,इस वंश की स्थापना शुर ने की थी इसलिए इसे सुर वंश भी कहा जाता है । इनका राजचिन्ह – गजलक्ष्मी और राजधानी – आरंग…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-3 माहाजनपद काल )

chhattisgarh history notes in hindi – mahajanpad kaal माहाजनपद काल :-  ● व्हेनसांग ने 639 ई० के आसपास छत्तीसगढ़ की यात्रा की थी। उनके किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन माह निवासरत थे ● गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-2 वैदिक काल )

Chhattisgarh history notes – vaidik-kal वैदिक काल ऋग्वेद में छत्तीसगढ़ का उल्लेख नही है। शतपथ ब्राम्हण में पूर्व व पक्षिम में समुद्र का उल्लेख है। पुराणों में कन्हार नदी को रेणू नदी कहा गया है। उत्तर वैदिक काल में आर्यो का प्रवेश व प्रसार छत्तीसगढ़ में हुआ।    रामायण काल :-  इस काल में विन्ध्य…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास (Part-1 प्रागैतिहासिक काल)

प्रागैतिहासिक काल प्रागैतिहासिक काल में पूर्ण पाषाण काल, मध्य पाषाण काल, उत्तर पाषाण काल और नव पाषाण काल को शामिल किया गया है 1. पूर्ण पाषाण काल :-  ● इस काल के प्रमाण – छ. ग. के रायगढ़ के सिघंपुर गुफा से प्राप्त शैल चित्रों से मिला है, ( सिंघनपुर में मानव आकृतिया, सीधी डंडे…


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