छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-7 शरभपुरीय वंश )

Chhattisgarh history notes –  about sharabhpuriya vansh संस्थापक :- शरभराज – शरभपुर आधुनिक सारंगढ़ ( शरभपुरीय वंश का शासनकाल 475 से 590 तक था।) इनका शासन काल ईसा के 6 वीं शताब्दी में था । इस वंश को अमरार्य / अमरज कुल भी कहा जाता था। इस वंश के लेख सम्बलपुर(ओडिशा) से प्राप्त अतः इतिहास…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-6 नल वंश )

Chhattisgarh history notes – About Naal Vansh इस वंश के संस्थापक शिशुक (290-330 ई.) था , परन्तु वास्तविक संस्थापक वराहराज (330-370ई.) को माना जाता है। नल वंश का शासन छत्तीसगढ़ में 5 -12 ई. तक था। इनका शासन क्षेत्र बस्तर ( कोरापुट – वर्त्तमान कांकेर ) था, तथा इनकी राजधानी पुष्करी (वर्त्तमान : भोपालपट्टनम –…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-5 राजर्षि तुल्य वंश )

Chhattisgarh history notes – about rajshree tulya vansh राजर्षि तुल्य वंश ( सुर वंश ):-  राजर्षि तुल्य वंश ने दक्षिण कोशल पर 5 वीं 6 वीं शताब्दी तक शासन किया था,इस वंश की स्थापना शुर ने की थी इसलिए इसे सुर वंश भी कहा जाता है । इनका राजचिन्ह – गजलक्ष्मी और राजधानी – आरंग…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-4 गुप्तकाल काल )

chhattisgarh history notes in hindi – gupt kaal गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त (400 ई.) के दरबारी कवि हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त के दक्षिण भारत के धर्मविजय अभियान का उल्लेख है . इस अभियान के दौरान समुद्रगुप्त ने दक्षिण कोसल के शासक महेंद्र एवं महाकान्तार ( बस्तर क्षेत्र ) के शासक व्याघ्र्राज को परास्त किया…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-2 वैदिक काल )

Chhattisgarh history notes – vaidik-kal वैदिक काल ऋग्वेद में छत्तीसगढ़ का उल्लेख नही है। शतपथ ब्राम्हण में पूर्व व पक्षिम में समुद्र का उल्लेख है। पुराणों में कन्हार नदी को रेणू नदी कहा गया है। उत्तर वैदिक काल में आर्यो का प्रवेश व प्रसार छत्तीसगढ़ में हुआ।    रामायण काल :-  इस काल में विन्ध्य…


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