छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-11 फणिनाग वंश )

chhattisgarh history notes in hindi –  about funi naag vansh कवर्धा का फणिनाग वंश छत्तीसगढ़ की एक शाखा फणिनाग वंश ने 9 वीं से 15वीं सदी तक कवर्धा के आस पास शासन किया । ये अपनी उत्पत्ति अहि एवं जतकर्ण ऋषि की कन्या मिथिला से मानते है, जिस वजह से इस वंश को अहि-मिथिला वंश…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-09 सोमवंश )

Chhattisgarh history notes –  about som vansh सोम वंश का शासन छत्तीसगढ़ के कांकेर राज्य में 1125 ई. से 1344 ई. तक था। सिंहराज इस वंश के संस्थापक थे। कुछ इतिहास कार द्वारा माना जाता है की सोम वंश पाण्डु वंश की एक शाखा थी, जो कालांतर में सोमवंश के रूप में कांकेर में स्थापित…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-08 पाण्डु वंश )

Chhattisgarh history notes –  about pandu vansh पाण्डुवंशियों ने शरभपुरीय राजवंश को पराजित करने के बाद श्रीपुर को अपनी राजधानी बनाया। ईस्वी सन छठी सदी में दक्षिण कौसल के बहुत बड़े क्षेत्र में इन पाण्डुवंशियों का शासन था।इस वंश का शासन 6 ई से 7 वी ई तक रहा। प्रसिद्ध शासक उदयन :- आदिपुरुष कहा…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-7 शरभपुरीय वंश )

Chhattisgarh history notes –  about sharabhpuriya vansh संस्थापक :- शरभराज – शरभपुर आधुनिक सारंगढ़ ( शरभपुरीय वंश का शासनकाल 475 से 590 तक था।) इनका शासन काल ईसा के 6 वीं शताब्दी में था । इस वंश को अमरार्य / अमरज कुल भी कहा जाता था। इस वंश के लेख सम्बलपुर(ओडिशा) से प्राप्त अतः इतिहास…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-3 माहाजनपद काल )

chhattisgarh history notes in hindi – mahajanpad kaal माहाजनपद काल :-  ● व्हेनसांग ने 639 ई० के आसपास छत्तीसगढ़ की यात्रा की थी। उनके किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन माह निवासरत थे ● गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें…


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