सिंधु घाटी की सभ्यता


सिंधु घाटी की सभ्यता

  1. विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी की सभ्यता है इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से जाना जाता है|
  2. वर्ष 1856 ई. में ‘जॉन विलियम ब्रन्टम’ ने कराची से लाहौर तक रेलवे लाइन बिछवाने हेतु ईटों की आपूर्ति के इन खण्डहरों की खुदाई करवाई थी इस खुदाई में प्राप्त ईंट से 5,000 वर्ष पुरानी और पूरी तरह विकसित सभ्यता का पता चलता है| इस सभ्यता का नाम ‘हड़प्पा सभ्यता‘ का नाम दिया गया था।
  3. सिंधु घाटी की सभ्यता की खोज का पूरा श्रेय ‘रायबहादुर दयाराम साहनी’ को जाता है रायबहादुर दयाराम साहनी ने पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जॉन मार्शल के निर्देश से वर्ष 1921 में खुदाई की थी|
  4. वर्ष 1922 में श्री राखल दास बनर्जी ने पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के लरकाना ज़िले के मोहनजोदाड़ो में स्थित एक बौद्ध स्तूप की खुदाई के समय इस स्थान का पता चला जो सिंधु नदी ही सिमित इस कारण से इस सभ्यता को सिंधु घाटी सभ्यता नाम दिया गया| वर्ष 1927 में हड़प्पा नाम की जगह पर उत्खनन होने के कारण ‘सिन्धु सभ्यता’ का नाम ‘हड़प्पा सभ्यता’ पड़ा।
  5. अभी तक ऐसे 1000 स्थानों का पता चला है इनमे से 6 स्थानों को नगर की संज्ञा दी है जो इस प्रकार है हड़प्पा,मोहनजोदाड़ो,चन्हूदड़ों,लोथल,कालीबंगा,हिसार तथा बणावली|
  6. सिंधु सभ्यता की खुदाई में महत्त्वपूर्ण ध्वंसावशेषों को खोजा गया है जिनमे दुर्ग, रक्षा-प्राचीर, निवासगृह, चबूतरे तथा अन्नागार आदि शामिल है|
  7. सिंधु घाटी की सभ्यता के विस्तार के अवशेष पाकिस्तान और भारत के पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के भागों में पाया जाता है| इस सभ्यता का विस्तार ‘जम्मू’ के ‘मांदा’ से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने ‘भगतराव’ तक और पश्चिमी में ‘मकरान’ समुद्र तट पर ‘सुत्कागेनडोर’ से लेकर पूर्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ होने के साबुत प्राप्त हुए है| सिंधु सभ्यता के प्रमुख्य पुरास्थलों में से पश्चिमी पुरास्थल सुत्कागेनडोर,पूर्वी पुरास्थल आलमगीर, उत्तरी पुरास्थल मांडा तथा दक्षिणी पुरास्थल दायमाबाद स्थल शामिल है| ये भूभाग लगभग 12,99,600 वर्ग किलोमीटर तक फैले हुए है| सिन्धु सभ्यता का विस्तार का पूर्व से पश्चिमी तक 1600 किलोमीटर तथा उत्तर से दक्षिण तक 1400 किलोमीटर फैला हुआ था| यह सभ्यता
    सिंधु सभ्यता समकालीन मिस्र या सुमेरियन सभ्यता से अधिक विस्तृत सभ्यता थी|

सिंधु सभ्यता के प्रमुख्य स्थल


  1. बलूचिस्तान – प्राप्त जानकारी के अनुसार दक्षिणी बलूचिस्तान में सिंधु घाटी की सभ्यता के पुरास्थल अवशेष प्राप्त हुए है जिनमे से महत्पूर्ण स्थल में मकरान तट है मकरान तट प्रदेश पर मिलने वाले अनेक स्थलों में से पुरातात्विक दृष्टि से केवल तीन स्थल महत्त्वपूर्ण हैं जिसमे सुत्कागेनडोर (दश्क नदी के मुहाने पर),सुत्काकोह (शादीकौर के मुहाने पर),बालाकोट (विंदार नदी के मुहाने पर) तथा डावरकोट (सोन मियानी खाड़ी के पूर्व में विदर नदी के मुहाने पर) शामिल है|
  2. उत्तर पश्चिमी सीमांत – उत्तर पश्चिमी सीमांत में गुमला जो अफ़ग़ानिस्तान जाने का मार्ग है जहाँ सिंधु पूर्व सभ्यता केअवशेष प्राप्त हुए है|
  3. सिंधु – यहाँ प्राप्त स्थल में मोहनजोदड़ों,चन्हूदड़ों,जूडीरोजोदड़ों,आमरी,कोटदीजी,अलीमुराद,रहमानढेरी तथा राणाधुडई आदि शामिल है|
  4. पश्चिमी पंजाब – यहाँ प्राप्त स्थलों में से डेरा इस्माइलखाना,जलीलपुर,रहमानढेरी,गुमला तथा चक-पुरवानस्याल शामिल है|
  5. बहावलपुर – सरस्वती नदी के मार्ग पर स्थित हकरा,घग्घर हमरा अर्थात सरस्वती दृशद्वती नदियों की घाटियों में हड़प्पा संस्कृति के स्थलों का सर्वाधिक संकेन्द्रण (सर्वाधिक स्थल) प्राप्त हुआ है।
  6. राजस्थान – यहाँ के बहाबलपुर में बहुत से स्थलों के क्रम प्राप्त हुए है प्राचीन सरस्वती नदी के सूखे हुए मार्ग पर स्थित है| सरस्वती नदी को ‘घघ्घर’ के नाम से जाना जाता है| महत्त्वपूर्ण स्थल ‘कालीबंगा’ है। कालीबंगा नामक पुरास्थल पर भी पश्चिमी से गढ़ी और पूर्व में नगर के दो टीले, हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ों, की भांति विद्यमान है। राजस्थान के समस्त सिंधु सभ्यता के स्थल आधुनिक गंगानगर ज़िले में आते हैं।
  7. हरियाणा – हरियाणा के हिसार ज़िले में बनवाली इसके अलावा यहाँ मिथातल,सिसवल,वणावली,राखीगढ़,वाड़ा तथा वालू नामक स्थल शामिल है जहाँ उत्खनन किया जा चूका है|
  8. पूर्वी पंजाब – यहाँ प्राप्त महत्पूर्ण स्थल रोपड़ संधोल है इसके अलावा कोटलानिहंग ख़ान,चक 86 वाड़ा,ढेर-मजरा आदि शामिल है इन स्थलों में सिंधु घाटी के सभ्यता के अवशेष है|
  9. गंगा-यमुना दोआब – आलमगीर प्रमुख्य स्थल है एक अन्य प्राप्त स्थल सहारनपुर ज़िले में स्थित ‘हुलास’ तथा ‘बाड़गांव’ है। हुलास तथा बाड़गांव की गणना पश्वर्ती सिन्धु सभ्यता के पुरास्थलों में की जाती है।
  10. जम्मू – यहाँ प्राप्त स्थल में भांडा है जो अखनूर के निकट स्थित है|
  11. गुजरात – 1947 की खुदाई में प्राप्त अवशेषों में गुजरात के ‘कच्छ’, ‘सौराष्ट्र’ तथा गुजरात के मैदानी भागों में सैंधव सभ्यता से सम्बन्घित 22 पुरास्थल है, जिसमें से 14 कच्छ क्षेत्र में तथा शेष अन्य भागों में स्थित है। गुजरात प्रदेश में ये पाए गए प्रमुख पुरास्थलों में ‘रंगपुर’, ‘लापेथल’, ‘पाडरी’, ‘प्रभास-पाटन’, ‘राझदी’, ‘देशलपुर’, ‘मेघम’, ‘वेतेलोद’, ‘भगवतराव’, ‘सुरकोटदा’, ‘नागेश्वर’, ‘कुन्तासी’, ‘शिकारपुर’ तथा ‘धौलावीरा’ आदि शामिल है|
  12. महाराष्ट्र – यहाँ प्राप्त स्थलों में दायमाबाद है जहाँ मिट्टी के ठीकरे प्राप्त हुए है महाराष्ट्र और दायमादाबद नामक स्थान से प्राप्त हुआ है – इसमें ‘रथ चलाते मनुष्य’, ‘सांड’, ‘गैंडा’, और ‘हाथी’ की आकृति प्रमुख है। यह सभी ठोस धातु की है|
  13. अफ़ग़ानिस्तान – मुंडीगाक और सोर्तगोई दो पुरास्थल प्राप्त हुए है जहाँ सिंधु घाटी की सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए है| मुंडीगाक का उत्खनन ‘जे.एम. कैसल’ द्वारा किया गया था तथा सोर्तगोई की खोज एवं उत्खनन ‘हेनरी फ्रैंकफर्ट’ द्वारा कराया गया था।

सिंधु सभ्यता का काल निर्धारण



सिंधु सभ्यता के काल का निर्धारण 1920 ईसा पूर्व के दशक में सर्वप्रथम खुदाई के बाद हड़प्पा सभ्यता का पता चला था इसके काल के निर्धारण प्रमुख्य बातें से हुआ

  1. मेसोपोटामिया में उर तथा किश नामक स्थल में जॉन मार्शल द्वारा द्वारा खुदाई में पाई गई मुद्राओं के द्वारा हड़प्पा संस्कृति का पता चलता है| 1931 ई. में सभ्यता का काल 3250 ई.पू. 2750 ई.पू. तक निर्धारित किया गया|
  2. 2500 – 1500 ई.पू. तक के काल को ह्वीलर ने इस सभ्यता का काल कहा है
    1. पूर्व हड़प्पाई चरण: लगभग 3500-2600 ई.पू.
    2.  परिपक्व हड़प्पाई चरण – लगभग 2600-1900 ई.पू.
    3. उत्तर हड़प्पाई चरण: लगभग 1900-1300 ई.पू.
    4. रेडियो कार्बन ‘C-14’ के द्वारा 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. के काल को हड़प्पा सभ्यता का काल माना गया है|

सिंधु सभ्यता के मुख्य स्थल


  1. हड़प्पा – हड़प्पा 6000-2600 ईसा पूर्व की एक सुव्यवस्थित नगरीय सभ्यता है| यह क्षेत्र पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है| इस सभ्यता में मिस्र और मैसोपोटामिया जैसी ही प्राचीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए है| इसकी खोज 1920 ई. में की गई थी| वर्ष 1857 में लाहौर मुल्तान बीच रेलमार्ग बनाने हेतु हड़प्पा की खुदाई में प्राप्त ईंटों का इस्तेमाल किया गया था|
  2. मोहनजोदड़ो – यह सभ्यता 2600 ईसा पूर्व की सभ्यता थी जो अत्यंत सुव्यवस्थित नगरीय सभ्यता थी| मोहन जोदड़ो को मुर्दो का टीला के नाम से जाना जाता है| यह सभ्यता मिस्र और मैसोपोटामिया जैसी सभ्यता अत्यंत प्राचीन सभ्यता है|
  3. इस सभ्यता के अवशेष पाकिस्तान के सिन्ध प्रान्त के लरकाना ज़िले में, सिंधु नदी के किनारों में नगर क़रीब 5 कि.मी. तक फैला है| मोहनजोदड़ों के टीलो का 1922 ई. में खोजने का श्रेय राखालदास बनर्जी को प्राप्त हुआ।
  4. चन्हूदड़ों – मोहनजोदाड़ो के दक्षिण में स्थित स्थल को चन्हूदड़ों के नाम से जाना जाता है| इसकी स्थान की खोज 1931 में एन.गोपाल मजूमदार ने की थी| इस स्थान पर मुहर एवं गुड़ियों के निर्माण के अवशेष प्राप्त हुए है साथ साथ यहाँ हड्डियों से वस्तुओं के निर्माण के अवशेष प्राप्त हुए है| इसके साथ ही 1943 ई में मैके ने करवाई थी जिससे यहाँ सैंधव संस्कृति के साक्ष्य प्राप्त हुए है|
  5. लोथल – लोथल गुजरात के अहमदाबाद ज़िले में भोगावा नदी के किनारे सरगवाला नाम के गांव के समीप स्थित है इस स्थान की खुदाई 1954-55 में रंगनाथ राव ने करवाई थी| यहाँ प्राप्त अवशेषों में एक पूरी बस्ती एक ही दीवार से घिरी हुई मिली|
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