जैव ईंधन नीति को लागू करने वाला राजस्थान बना पहला राज्य


Rajasthan first State to implement biofuel policyजैव ईंधन नीति को लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य बन गया है जैव ईंधन नीति का लघुकरण केंद्र सरकार द्वारा मई 2018 में प्रस्तुत की गई जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति के तहत हुआ है| इसके साथ अब राजस्थान तेल बीजों के उत्पादन में वृद्धि करने वाले तरीकों में ध्यान दे रही है तथा इसके साथ ही राजस्थान सरकार वैकल्पिक ईंधन और ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र में विशेष खोज बिन किये जाने हेतु बढावा दे रहा है|

प्रमुख्य बातें –

  1. जैव ईंधन नीति को लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य बन गया है तथा साथ ही राजस्थान सरकार तेल बीजों के उत्पादन तथा वैकल्पिक ईंधन और ऊर्जा संसाधनों के क्षेत्र के अनुसन्धान हेतु कर रहा है|राष्ट्रीय नीति किसानों को उनके अधिशेष अत्पादन का आर्थिक लाभ देने तथा तेल आयात को देश में काम करने में सहायता प्रदान करेगी|
  2. राजस्थान सरकार भारतीय रेलवे द्वारा प्रदान की गई वित्तीय सहायता के द्वारा 8 टन प्रतिदिन की क्षमता वाला बायोडीजल संयंत्र स्थापित किया है साथ ही साथ राज्य सरकार जैव ईंधन के विपणन को बढ़ावा दे रही है तथा लोगों को इसके लिए जागरूक भी कर रही है| साथ ही साथ राजस्थान सरकार राज्य ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (SRLDC) बायोडीजल की आपूर्ति के द्वारा आय अर्जन हेतु अन्य माध्यमों का पता लगाने हेतु महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को भी प्रोत्साहित करेगी|
  3. जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 के तहत एथेनॉल उत्पादन हेतु कच्चे माल जैसे गन्ने का रस, चीनी युक्त सामग्री, स्टार्च युक्त सामग्री तथा क्षतिग्रस्त अनाज, जैसे- गेहूं, टूटे चावल और सड़े हुए आलू का उपयोग किया जायेगा| तथा साथ ही पहली पीढ़ी (1जी) के बायोएथेनॉल और बायोडीजल तथा विकसित जैव ईंधनों यानी दूसरी पीढ़ी (2जी) के एथेनॉल, निगम के ठोस कचरे (एमएसडब्ल्यू) से लेकर ड्रॉप-इन ईंधन, तीसरी पीढ़ी (3जी) के जौव ईंधन, बायोसीएनजी आदि को श्रेणीबद्ध भी किया जायेगा |

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