राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां [Legislative powers of President of india]


  • संविधान के अनुच्छेद 58(1)(2) के अंतर्गत राष्ट्रपति संसद का अधिवेशन आहूत व स्थगित कर सकता है , लोकसभा को भांग कर सकता है, दोनों सदनों में अगर किसी साधारण विधेयक पर गतिरोध हो तो अनुच्छेद 108 के अधीन संसद का संयुक्त अधिवेशन बुला सकता है |
  • राष्ट्रपति साधारण विधेयक को पुर्नविचार के लिए लौटा सकता है | संविधान में यह नहीं बताया की राष्ट्रपति कितने समय के अंदर विधेयक को स्वीकृति दे | कई बार राष्ट्रपति की स्वीकृति न मिलने पर विधेयक स्वतः समाप्त हो जाते है | इसे जेबी वीटो कहते है | ऐसा तीन बार हुआ है |
  • कुछ विशेष प्रकार के विधेयक को संसद में पेश करने से पूर्व राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति लेनी पड़ती है , जैसे नए राज्यों का निर्माण या वर्तमान राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन (अनुच्छेद 2), धन-विधेयक (अनुच्छेद 110) आदि |
  • अनुच्छेद 123 (1) के अंतर्गत संसद के विश्रान्तिकाल में राष्ट्रपति के पास अध्यादेश जारी करने की शक्ति मौजूद है | इसका प्रभाव संसदीय अधिनियम की तरह होता है |

 

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