भारत का संविधान (राष्ट्रपति) [constitution of india(president)]


राष्ट्रपति (अनुच्छेद 52-62, 71-73,123)

  • संसदीय प्रणाली में दो तरह के प्रमुख्य होते हैं – राज्यों का प्रमुख एवं शासन का प्रमुख |  भारत में संसदीय प्रणाली अपनायी गई है, अतः यहाँ भी दो तरह के प्रधान है|
  • राष्ट्रपति राज्यों का प्रधान है तथा प्रधानमंत्री शासन का |
  • भारतीय संविधान के अनुसार 52 में कहा गया है की भारत का एक राष्ट्रपति होगा और अनुच्छेद 53 के अनुसार ‘संघ की सम्पूर्ण कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी, जिसका प्रयोग वह खुद या अपने अधीनस्थों के माध्यम से करेगा, अर्थात वह मंत्रीपरिषद् की सलाह से कार्य करेगा |’

राष्ट्रपति का चुनाव

  • भारत के राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप अनुच्छेद 54 के अनुसार एक निर्वाचक मंडल द्वारा 5 वर्ष के लिए किया जाता है, जिसमे संसद के दोनों सदनों तथा राज्यों की विधानसभों के केवल निर्वाचित सदस्य भाग लेते है |
  • निर्वाचन अनुपातिक प्रतिनिध्त्वि पद्धाति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है | अनुच्छेद 55 के अनुसार यह सुनाचित किया गया है कि निर्वाचन में भिन्न भिन्न राज्यों के प्रतिनिद्दित्व  प्रत्येक राज्य की जनसँख्या और विधानसभा  के लिए निर्वाचित सदस्यों की कुल संख्या के अनुसार एकरूपता होगी |
  • राष्ट्रपति पद के लिए चुनव लड़ने वाले व्यक्ति में निम्न लिखित योग्यता होनी चाहिए |
    • वह भारत का नागरिक हो |
    • वह 35 वर्ष की आयु पूरी कर चूका हो |
    • वह लोक सभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो |
    • वह संघ या राज्य या स्थानीय सरकार के अधीन किसी लाभप्रद पद पर कार्यरत न हो | राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति ,राज्यपाल व मत्रियों के लिए चुनाव लड़ने से पूर्व त्यागपत्र देना आवश्यक नहीं, किन्तु वह संसद विधान मंडल का सदस्य नहीं हो सकता |
    • उसे निर्वाचक मंडल के कम से कम 50 मतदाताओं द्वारा प्रस्तवित एवं 50 अन्य मतदाताओं द्वारा समर्थित होना चाहिए|
  • राष्ट्रपति के निर्वाचन से सम्बंधित सभी विवादों की जाँच और विनिश्चय (अनुच्छेद 71 ) उच्चतम न्यायलय द्वारा किया जाता है |
  • निर्वाचन को सिर्फ निर्वाचक या  प्रत्याशी ही चुनौती दे सकता है | राष्ट्रपति का निर्वाचन न्यायालय द्वारा सवैध घोषित किये जाने पर उसके द्वारा पद की शक्तियों के प्रयोग में किये गए कार्य अमान्य होंगे|

राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया

  • राष्ट्रपति को संविधान के उल्लंघन के आधार पर केवल महाभियोग द्वारा हटाया जा सकता है (अनुच्छेद 61) |
  • ऐसा प्रस्ताव लोकसभा या राज्यसभा में पेश हो सकता है | महाभियोग प्रस्ताव पेश करने का नोटिस इस सदन के एक -चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर द्वारा 14 दिन पहले देना जरूरी है |

राष्ट्रपति की पदावधि

  • राष्ट्रपति पदग्रहण की तारीख से 5 वर्ष की अवधि तक अपने पद पर बना रह सकता है | लेकिन इस 5 वर्ष की अवधि के पूर्व भी वह उपराष्ट्रपति की अपना त्याग पत्र दे सकता है या उसके द्वारा संविधान का अतिक्रमण करने पर महाभियोग प्रक्रिया के द्वारा हटाया जा सकता है |
  • सामान्य परिस्थियों में राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने से पूर्व ही चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए , किन्तु किसी कारण से ऐसा संभव न हो, तो वर्तमान राट्रपति तब तक पद पर रहेंगे |

राष्ट्रपति के वेतन और भत्ते

  • राष्ट्रपति का वेतन बढ़ाकर 1,50,000 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया है |

राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया

  • राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है , जिसके सदस्य होते है –
    • संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, तथा
    • राज्यों की विधानसभों के निर्वाचित सदस्य(संसद के मनोनीत सदस्यों को राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेने का अधिकार नहीं है | )
  • 70वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में दिल्ली व पांडिचेरी विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भाग लेंगे |
  • 11वें संविधान संशोधन,1961 द्वारा यह व्यवस्था कर दी गई है कि निर्वाचक मंडल में किसी स्थान के रिक्त होते हुए भी राष्ट्रपति का चुनाव कराया जा सकता है |
  • प्रत्येक राज्य की जनसँख्या को उस राज्य की विधानसभा की कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या से विभाजित किया जाता है और जो भागफल होता है ,उसे पुनः 1000 से विभाजित किया जाता है | ऐसा करने के बाद जो अंतिम भागफल आता है, वह प्रत्येक विधायक मत का मूल्य होता है |
  • पुरे भारत की समस्त विधानसभाओं के सदस्यों के कुल मतों की संख्या को संसद के दोनों सदनों के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या से विभाजित करने के बाद जो भागफल आता है, वही प्रत्येक संसद सदस्य के मत का मूल्य होता है |

  • राष्ट्रपति चुनाव में एक बार को छोड़कर सभी बार प्रथम गणना में ही निर्धारित संख्या उम्मीदवार ने प्राप्त कर ली है | 1969 के राष्ट्रपति चुनाव में पहली और अंतिम बार दूसरे दौर की मतगणना करनी पड़ी थी , जब दूसरे के बाद ही वी. वी. गिरि ने निर्धारित कोटे को प्राप्त किया था |

राष्ट्रपति की शक्तियां

  • संविधान में राष्ट्रपति की अनेक शक्तियों का उल्लेख किया गया है | अध्ययन की सुगमता की दृष्टि राष्ट्रपति की शक्तियों को निम्नलिखित शीर्षकों में बांटा जा सकता है |
  • भारतीय संघ की सभी कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति निहित है | अनुच्छेद 74 के अनुसार मंत्रिपरिषद की मदद से राष्ट्रपति इनके कार्यों पर नियंत्रण रखते है| इनके कार्यों का बंटवारा अनुच्छेद 77 के अनुसार राष्ट्रपति ही करते है, व्यव्हार में सलाह प्रधानमंत्री देते है कि कार्य का बंटवारा कैसे हो |
  • अनुच्छेद 78 के अनुसार, प्रधानमंत्री का दायित्व है की वह राष्ट्रपति को मत्रिमंडल द्वारा संघ प्रशासन तथा व्यवस्थापन सम्बन्धी प्रस्तावों की सूचना दें |  राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को किसी  ऐसे मामले पर विचार करने के लिए कह सकते है जिसके बारे में किसी मंत्री ने घोषणा की हो,परन्तु मत्रिमंडल ने विचार न किया  हो |
  • राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों, नियंत्रक व महालेखा परीक्षक, महान्यावादी, सर्वोच्च व उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों व  अन्य  न्यायाधीशों ,राज्यपालों,विदेशों में राजदूतों ,संघ लोक सेवा आयोग के सभापति व सदस्यों, मुख्य चुनाव आयुक्त व अन्य आयोगों के अध्यक्षों व सदस्यों की नियुक्ति करते हैं |

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