मंत्रिपरिषद एवं मुख्यमंत्री (संविधान का छठा भाग)


  1. संविधान के अनुच्छेद 163(1) के अनुसार, राज्यपाल के विवेकी कार्यों में को छोड़कर,उसे अन्य कार्यों में सहायता प्रदान करने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा।
  2. अनुच्छेद 163(2) के अनुसार, राज्यपाल द्वारा अपने विवेक से किये गये कार्यों पर यह प्रश्न नहीं उठेगा कि ऐसा करना उसके विवेकाधिकार में नहीं था। पुन: अनुच्छेद 163(3) में कहा गया है कि मंत्रिपरिषद ने राज्यपाल को क्या सलाह दी, यह प्रश्न भी किसी न्यायालय में नहीं उठाया जा सकेगा|
  3. संसदीय प्रणाली होने के कारण केंद्रीय मंत्रिपरिषद की तरह राज्य की मंत्रीपरिषद भी वास्तविक कार्यपालिका है,जबकि राज्यपाल का पद एवं उसकी स्थिति राष्ट्रपति की तरह संवैधानिक है|
  4. अनुच्छेद 164(1) के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होगी। अनुच्छेद 164(4) के अनुसार,यदि कोई मंत्री किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो उसे 6 महीने के अन्दर किसी भी सदन (राज्य विधानमंडल के) का सदस्य बन जाना होगा, अन्यथा वह 6 महीने बाद मंत्री नहीं रह सकेगा।
  5. संविधान के अनुच्छेद 164(5) के अनुसार, मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा बनायी गयी विधियों के अनुसार होंगे।
  6. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 में कहा गया है कि मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य होगा कि वह राज्यपाल को राज्य मंत्रिपरिषद एवं विधानमंडल की कार्यवाहियों के बारे में सूचित करे। अनुच्छेद 167(ख) के अनुसार,राज्य प्रशासन के संदर्भ में सूचना माँगे जाने पर मुख्यमंत्री राज्यपाल को सूचना देगा एवं अनुच्छेद 167(ग) के अनुसार, यदि किसी मंत्री ने किसी विषय पर कोई आश्वासन दिया है, तो राज्यपाल के कहने पर उसे मंत्रिपरिषद में रखा जायेगा।
  7. संविधान के अनुच्छेद 165 के अनुसार, प्रत्येक राज्य में एक महाधिवक्ता होगाजिसकी नियुक्ति राज्यपाल करेगा एवं वह राज्यपाल के प्रसाद पर्यन्त ही पद धारण करेगा। यदि कोई व्यक्ति उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता है, तो उसकी नियुक्ति महाधिवक्ता पद पर हो सकती है।
  8. महाधिवक्ता राज्य का प्रथम विधि अधिकारी होगा और राज्यपाल द्वार सलाह मांगे जाने पर उसे अपनी कानूनी सलाह उपलब्ध करवायेगा।
  9. महाधिवक्ता विधानमंडलों की बैठक में भाग ले सकेगा, लेकिन उसे मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं होगा। महाधिवक्ता को वही वेतन मिलेगा जो राज्यपाल समय-समय पर निश्चित करेगा।
  10. मंत्रिपरिषद के प्रमुख कार्यों में नीति-निर्माण करना एवं उसे लागू करना,नियुक्ति करना,प्रशासन पर नियंत्रण रखना,बजट पेश करना, कानून बनाना तथा शांति एवं व्यवस्था स्थापित करना आदि आते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Welcome to cgpsc.info

हमारे एंड्राइड अप्प को डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए प्ले स्टोर आइकॉन पर क्लिक करें- धन्यवाद