छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-2 वैदिक काल )


Chhattisgarh history notes – vaidik-kal

वैदिक काल


  1. ऋग्वेद में छत्तीसगढ़ का उल्लेख नही है।
  2. शतपथ ब्राम्हण में पूर्व व पक्षिम में समुद्र का उल्लेख है।
  3. पुराणों में कन्हार नदी को रेणू नदी कहा गया है।
  4. उत्तर वैदिक काल में आर्यो का प्रवेश व प्रसार छत्तीसगढ़ में हुआ।

 

  1.  रामायण काल :-
    1.  इस काल में विन्ध्य पर्वत के दक्षिण में कोसल नामक राजा थे जिनके नाम पर यह
      राज्य को कोसल कहा जाने लगा,
    2. इस समय दक्षिण कोसल एवं उत्तर कोसल दो भाग थे,
    3. छ.ग. दक्षिण कोसल का हिस्सा था, अतः छ.ग. दक्षिण कोसल कहा जाने लगा,
    4. इस काल में बस्तर को दण्डकारण्य कहा जाता था,
    5. दक्षिण कोसल के राजा – राजा भानुमंत थे, जिनकी पुत्री कौशल्या थी,
    6. दक्षिण कोसल की राजधानी – श्रावस्ती थी,
    7. कौशल्या का विवाह उत्तर कोसल के राजा- राजा दशरथ के साथ हुआ,
    8. राजा भानुमंत का कोई पुत्र नही था अतः राजा भानुमंत की मृत्यु के बाद, राजा दशरथ दक्षिण कोसल के राजा बने।
    9. राजा दशरथ के बाद श्री राम यहाँ के राजा बने, उनके बाद उनके पुत्र लव और कुश हुए
    10. लव उत्तर कोसल के राजा बने, तथा कुश दक्षिण कोसल के राजा बने,
    11. कुश की राजधानी कुशस्थली थी ( श्रावस्ती का ही नाम था )

रामायण काल के कुछ प्रसिद्धस्थल है –


  1. शिवरीनारायण – राम के वनवास का अधिकांश भाग यही व्यतीत हुआ था, यहाँ पर श्री राम ने सबरी के जूठे बेर खाए
  2. तुरतुरिया – ऋषि वाल्मीकि का आश्रम है, राम द्वारा माता सीता को त्यागे जाने पर, माता सीता ने यहाँ शरण लिया था, और, लव और कुश का यहाँ जन्म हुआ था, यह स्थान बलोदाबजार जिले में स्थित है|
  3. सरगुजा – रामगढ़, सिताबोंगरा गुफा, लक्ष्मण बेन्ग्र, किसकिन्धा पर्वत, सीताकुंड, हाथिखोह आदि है
  4. खरौद में – खरदूषण का शासन था, यह स्थान जांजगीर चाम्पा में है,

महाभारत काल :-

  1. इस काल में छ.ग. को कोसल व प्राककोसल कहा जाता था,
  2. बस्तर के अरण्य क्षेत्र को कान्तर कहा जाता था,
  3. इस काल के शासक मोर ध्वज व ताम्र ध्वज थे,
  4. मोरध्वज की राजधानी- आरंग, व ताम्रध्वज की राजधानी- मणिपुर थी
  5. मणिपुर – वर्तमान में रतनपुर ही मणिपुर था
  6. भाब्रूवाहन की राजधानी चित्रन्गदपुर थी,
  7. चित्रन्गादपुर, सिरपुर का बदला हुआ नाम था,
  8. भाब्रूवाहन- अर्जुन और चित्रांगदा के पुत्र थे,
  9. गूंजी – यह क्षेत्र ऋषभतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध था, जो की जांजगीर चाम्पा में है
  10. बाद में प्राककोसल को सहदेव ने जित लिया था,

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