छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-3 माहाजनपद काल )


chhattisgarh history notes in hindi – mahajanpad kaal

माहाजनपद काल :- 

● व्हेनसांग ने 639 ई० के आसपास छत्तीसगढ़ की यात्रा की थी। उनके किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन माह निवासरत थे
● गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें “अवदान शतक नामक ग्रन्थ” से मिलता है।
● छ.ग. चेदी महाजनपद का हिस्सा था, इसी कारन इसे चीदिसगढ़ कहा जाता था।
● बौद्ध धर्म से सम्बंधित स्थान – सिरपुर, तुरतुरिया, तुम्मण, खल्लारी, बस्तर के भोगापाल आदि में मिलते है।

(1) मौर्यकाल :- 
● छ.ग. में मौर्य काल के कुछ प्रमाण प्राप्त हुए है
● छ.ग. के तोसली में मौर्यकालीन अशोक के अभिलेख मिले है
● सरगुजा में जोगीमारा गुफा मौर्यकालीन है
● सूरजपुर के रामगढ़ के सिताबोंगरा गुफा में विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला मिली है|
● मौर्य कालीन सिक्के — रायगढ़ जिले के सारंगढ़,जांजगीर चाम्पा में अकलतरा, ठाठरी, रायपुर के तारापुर आदि जगहों पर मौर्यकालीन सिक्के मिले है
● जोगीमारा गुफा – देवदासी सुतनुका (नृत्यांगना) एवं देवदत्त नामक नर्तक की प्रणय गाथा मिलती है, जो की पालीभाषा, और ब्राम्ही लिपि में है।

(2) सातवाहन काल :- 
● छ.ग. में सातवाहन काल ने लम्बे समय तक शासन किया ।
● सातवाहन राजा अपीलक का एक मात्र मुद्रा जांजगीर जिले के बालपुर एवं बिलासपुर जिले के मल्हार से प्राप्त हुए है|
● जांजगीर चाम्पा के किरारी नामक गाँव के तालाब में सातवाहन कालीन काष्ठ स्तम्भ मिला है,इसमें कर्मचारियों,अधिकारियो के पद व नाम है।
● इस काल के शिलालेख जांजगीर.चाम्पा के दमाऊदरहा में मिले है, जिसकी भाषा प्राकृत है, इस शिलालेख में सातवाहन राजकुमार वरदत्त का उल्लेख मिलता है।

(3) कुषाण काल :-
● इस वंश के प्रमुख शासक विक्रमादित्य व कनिष्क थे।
●इस वंश के शासक कनिष्क के सिक्के रायगढ़ जिले के खरसिया के तेलिकोट गाँव से पुरातत्ववेत्ता डॉ. सी. के. साहू को मिले थे।
● ताम्बे के सिक्के बिलासपुर के चकरबेड़ा से मिले है।

(4) मेघ वंश :- 
गुप्तों के पहले मेघ वंश के शासकों ने राज्य किया ।
200 ई.पू. से 400 ई.पू. तक शासन या अन्यत्र, परन्तु सिक्के मल्हार से प्राप्त ।

(5) वकाटक वंश ( 3 – 5 वीं शताब्दी ) :-

(a) प्रवरसेन प्रथम :- 
● छत्तीसगढ़ क्षेत्र में इस वंश का संस्थापक थे, इन्होंने ने समस्त दक्षिण कोसल को जीत लिया था।
● इनकी राजधानी – नन्दिवर्धन ( नागपुर ) थी।

(b) नरेंद्रसेन :–
● इसके द्वारा कोशल, मालवा, मैकल, पर विजय का उल्लेख हमें पृथ्वीसेन द्वितीय के बालाघाट ताम्रपत्र से मिलता है।
● नल शासक भवदत्त वर्मा ने नरेन्द्रसेन की राजधानी नंदिवर्मन ( नागपुर ) पर आक्रमण कर उसे पराजित किया।

(c) पृथ्वीसेन- II :-
● इसने नलवंशी भवदत्त के बेटे अर्थ पति भट्टारक को हराया था।
● इसने पुष्करी भोपालपटनम को बर्बाद कर दिया था।

(d) प्रवरसेन द्वितीय :-
● इनके शासन काल में प्रसिद्ध कवि कालिदास छत्तीसगढ़ आये थे।

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