छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-4 गुप्तकाल काल )


chhattisgarh history notes in hindi – gupt kaal

  1. गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त (400 ई.) के दरबारी कवि हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त के दक्षिण भारत के धर्मविजय अभियान का उल्लेख है . इस अभियान के दौरान समुद्रगुप्त ने दक्षिण कोसल के शासक महेंद्र एवं महाकान्तार ( बस्तर क्षेत्र ) के शासक व्याघ्र्राज को परास्त किया , पर इस क्षेत्र का गुप्त साम्राज्य में विलय नहीं किया गया .
  2. बानबरद ( जिला – दुर्ग ) एवं आरंग ( जिला – रायपुर ) से प्राप्त गुप्तकालीन सिक्को से भी स्पस्ट होता है कि यहाँ के क्षेत्रीय शासकों ने गुप्तवंश का प्रभुत्व स्वीकार क्र लिया था .

* महत्वपूर्ण तथ्य :- 

  1. आरंग में कुमारगुप्त का सिक्का मिला है .
  2. 1972 में दुर्ग के बानाबरद से गुप्तकालीन 9 सिक्के प्राप्त हुए हैं :-
    1. 1- कांच (समुद्रगुप्त) ,
    2. 7-चन्द्रगुप्त द्वितीय तथा
    3. 1- कुमारगुप्त का 
  3. खरसिया के पास से विक्रमादित्य का धनुर्धारी सिक्का प्राप्त हुए है
  4. रायपुर के पिटाईवल्द से 1 सिक्का प्राप्त जिसमें – हरिषेण कृत प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त द्वारा पराजित दक्षिण कोशल के राजा महेंद्र व महाकान्तार के अधिपति व्याघ्र्राज का नाम उल्लेखित है .
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