छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-6 नल वंश )


Chhattisgarh history notes – About Naal Vansh

  1. इस वंश के संस्थापक शिशुक (290-330 ई.) था , परन्तु वास्तविक संस्थापक वराहराज (330-370ई.) को माना जाता है।
  2. नल वंश का शासन छत्तीसगढ़ में 5 -12 ई. तक था। इनका शासन क्षेत्र बस्तर ( कोरापुट – वर्त्तमान कांकेर ) था, तथा इनकी राजधानी पुष्करी (वर्त्तमान : भोपालपट्टनम – बीजापुर जिला ) थी।
  3. इस वंश का प्रतापी शासक भवदत्त वर्मन हुए। इस वंश के अन्तिम शासक नरेंद्र धवल (935-960 ई) था।
  4. वाकाटक इस वंश के समकालीन थे। इन दोनों वंशो के बिच लंबा संघर्ष चला।

नल वंश के प्रमुख शासक:-

  1. शिशुक (290-330 ई.)– संस्थापक
  2. वराहराज (330-370ई.) – ( वास्तविक संस्थापक ) एड़ेंगा के मुद्रा भाण्डो से वराहराज के 29 स्वर्ण मुद्रायें प्राप्त हुए हैं।
  3. भवदत्त वर्मन अर्थपति :- पोडगढ़ शिलालेख में इन्हें प्रथम शासक कहा गया है। नरेंद्रसेन के पुत्र पृथ्वीसेन द्वितीय ने भवदत्त वर्मन के पुत्र अर्थपति को पराजित कर अपने पिता के पराजय का बदला लिया ।इस युद्ध में अर्थपति की मृत्यु हो गयी ।
  4. स्कंदवर्मा :- नलवंश की पुनर्स्थापना की ,यह इस वंश का अत्यधिक शक्तिशाली शासक था ।
  5. स्तम्भराज
  6. पृथ्वीराज :- राजिम शिलालेख से प्राप्त जानकारी के अनुशार विलासतुंग के पितामह ।
  7. विरुपाक्ष :- राजिम शिलालेख से प्राप्त जानकारी के अनुशार विलासतुंग के पिता।
  8. विलासतुंग :- राजिम के राजीव लोचन मंदिर का निर्माण सन 712 ई. करवाया।
  9. पृथ्वीव्याघ्र
  10. भीमसेन
  11. नरेंद्र धवल (अंतिम शसक )

इस वंश के कुल पांच अभिलेख प्राप्त हैं :-

  1. भवदत्त वर्मा का ऋद्धिपुर (अमरावती ) ताम्रपत्र
  2. भवदत्त वर्मा का पोड़ागढ़ (जैपुर राज्य ) शिलालेख
  3. अर्थपति का केशरिबेढ़ ताम्रपत्र
  4. अर्थपति का पांडियापाथर लेख (उड़ीसा )
  5. विलासतुंग का राजिम शिलालेख

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