छत्तीसगढ़ प्रदेश के लोक गीतकार एवं जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन


Chhattisgarh current affairs – छत्तीसगढ़ प्रदेश के लोक गीतकार एवं जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन

छत्तीसगढ़ प्रदेश के लोक गीतकार एवं जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया का निधन हो गया उनके निधन पर प्रदेश के राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शोक व्यक्त किया है|

लोक गीतकार एवं जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया का छत्तीसगढ़ के कला और साहित्य से विशेष सम्बन्ध था| उन्होंने अनेक कविताओं तथा गीतों का सृजन किया था| उनके द्वारा लिखे गए संग्रहों में से हमू बेटा भुंंइया के, गंवई-गंगा, धुनही बंसुरिया, माटी कहे कुम्हार से, सिर्फ सत्य के लिए आदि है इसके साथ ही मूलतः गीतकार, मोर संग चलव रे, मैं छत्तीसगढ़िया अंब रे आदि लोकप्रिय गीतों की रचना आदि की रचना भी उन्होने की|

छत्तीसगढ़ प्रदेश के लोक गीतकार एवं जनकवि श्री लक्ष्मण मस्तुरिया का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तुरी की माटी में सात जून 1949 को हुआ था| ये मूलतः गीतकार हैं। बघेरा के दाऊ रामचंद्र देशमुख के ‘चंदैनी गोंदा’ में गीत लिखकर स्थापित हुए। कुछ समय तक स्कूल में अध्यापन किया। वर्तमान में राजकुमार कॉलेज रायपुर में 1988 से अध्यापन का कार्य। प्रकाशित पुस्तकें हमू बेटा भुइयां के, गंवई गंगा, धुनही बंसुरिया, माटी कहे कुम्हार से इत्यादि हैं। म्यूजिक इंडिया के अनेक गीतों पर कैसेट निकले। छत्तीसगढ़ फिल्म मोर छुइंया भुइंया के लिए गीत लिखे।

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