कोटगढ़ किले को संवारने के लिए किया जा रहा है 4 करोड़ रुपए राशि का उपयोग


कोटगढ़ किले को संवारने के लिए किया जा रहा है 4 करोड़ रुपए राशि का उपयोग किया जा रहा है| इसके संरक्षण हेतु भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा काम कराया जा रहा है प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हेतु चार करोड़ रुपए की स्वीकृत दी गई है| किले को चारों ओर से बाउंड्रीवॉल बनाकर सुरक्षित किया जा रहा है। इसके लिए तीन मीटर ऊंची दीवार उठाई जा रही है। उसके ऊपर लोहे की रेलिंग भी लगाई जाएगी। इसके साथ लोगों के आवागमन के लिए रास्ता भी बनाया जा रहा है| इसके अंडर बने 14 एकड़ के तालाब को संरक्षित किया जा रहा है साथ ही साथ उसका सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है|

प्रमुख्य बातें-

  1. भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा देश भर में स्थित प्राचीन किलों को संरक्षित एवं उसका रखरखाव करने के लिए कार्य योजना बनाकर किलों में चारों ओर बाउंड्रीवॉल करने के साथ-साथ किले की दीवारों को मरम्मत किया जा रहा है। कोटगढ़ किले में चारों ओर 3 किलोमीटर लम्बे बाउंड्रीवॉल का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। किले के मुख्य गेट के सामने सूचना बोर्ड लगाने के साथ-साथ दुधिया रोशनी की व्यवस्था की जाएगी।
  2. कोटगढ़ में वर्तमान में किले के दोनों ओर प्राचीन दरवाजे का शेष ही बच गया है। पुरातत्व विभाग रायपुर के उपसंचालक राहुल सिंह ने बताया किले के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ मुख्य दरवाजे से लगे हुए 14 एकड़ में फैले बड़े खईया तालाब में बोटिंग की योजना बनाई जा रही है ताकि पर्यटकों को लुभाया जा सके।
  3. पुरातत्व विभाग रायपुर के उपसंचालक राहुल सिंह के अनुसार कोटगढ़ का किला 18वीं शताब्दी में कसडोल के दीवान गुरुनेश्वर मिश्र के आधिपत्य में था। गुरुनेश्वर मिश्र एवं कसडोल के दीवान नारायण सिंह का किले में आधिपत्य को लेकर संघर्ष होते रहता था। गुरुनेश्वर मिश्र द्वारा अकलतरा नगर जाने के लिए किले से सुरंग बनवाई गई थी। वे अपनी घोड़ी बिजली में सवार होकर कोटगढ़ किले से सुरंग के माध्यम से अकलतरा नगर के पुरानी बस्ती में स्थित हाथी बंधान तक जाया करते थे।

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