जानिये छत्तीसगढ़ के खजुराहो भोरमदेव के बारे में

chhattisgarh geography notes in hindi

chhattisgarh geography notes in hindi – about bhoramdev temple

भोरमदेव का मंदिर भगवन शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है जो भोरमदेव छत्तीसगढ़ में स्थित है| इसमें चार मंदिरों का एक समूह शामिल है जो ईंट से बने नवीनतम मंदिरों से एक है| छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाने वाला भोरमदेव पर्यटकों का खास आर्कषण का स्थल है। यह मंदिर कवर्धा से 18 किमी दूर मैकाल पर्वत और प्रकृति की सुंदरता के बीच बसा है। 11 सदीं में बने इस मंदिर में प्राचीन पाषाण सभ्यताओं की मूर्तियां हैं। इसके अलावा यहां मंडवा महल व झेरकी महल भी देखने योग्य है।

भोरमदेव का प्रमुख मंदिर पत्थरों से बनाया गया है| कामुक मूर्तियों के साथ स्थापत्य विशेषताओं ने खजुराहो मंदिर और ओडिशा में कोणार्क सूर्य मंदिर की तरह एक अलग शैली दी है| जिसके कारण से भोरमदेव को ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ भी कहा जाता है| भोरमदेव को कलचुरी वंश के काल में बनाया गया था|

मंदिर का मुख पूर्व की ओर है। मंदिर नागर शैली का एक सुन्दर उदाहरण है। मंदिर में तीन ओर से प्रवेश किया जा सकता है। मंदिर एक पाँच फुट ऊंचे चबुतरे पर बनाया गया है। तीनों प्रवेश द्वारों से सीधे मंदिर के मंडप में प्रवेश किया जा सकता है। मंडप की लंबाई 60 फुट है और चौड़ाई 40 फुट है। मंडप के बीच में 4 खंबे हैं तथा किनारे की ओर 12 खम्बे हैं, जिन्होंने मंडप की छत को संभाल रखा है। सभी खंबे बहुत ही सुंदर एवं कलात्मक हैं। प्रत्येक खंबे पर कीचन बना हुआ है, जो कि छत का भार संभाले हुए है।

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