छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-09 सोमवंश )

Chhattisgarh history notes –  about som vansh सोम वंश का शासन छत्तीसगढ़ के कांकेर राज्य में 1125 ई. से 1344 ई. तक था। सिंहराज इस वंश के संस्थापक थे। कुछ इतिहास कार द्वारा माना जाता है की सोम वंश पाण्डु वंश की एक शाखा थी, जो कालांतर में सोमवंश के रूप में कांकेर में स्थापित…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-08 पाण्डु वंश )

Chhattisgarh history notes –  about pandu vansh पाण्डुवंशियों ने शरभपुरीय राजवंश को पराजित करने के बाद श्रीपुर को अपनी राजधानी बनाया। ईस्वी सन छठी सदी में दक्षिण कौसल के बहुत बड़े क्षेत्र में इन पाण्डुवंशियों का शासन था।इस वंश का शासन 6 ई से 7 वी ई तक रहा। प्रसिद्ध शासक उदयन :- आदिपुरुष कहा…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-7 शरभपुरीय वंश )

Chhattisgarh history notes –  about sharabhpuriya vansh संस्थापक :- शरभराज – शरभपुर आधुनिक सारंगढ़ ( शरभपुरीय वंश का शासनकाल 475 से 590 तक था।) इनका शासन काल ईसा के 6 वीं शताब्दी में था । इस वंश को अमरार्य / अमरज कुल भी कहा जाता था। इस वंश के लेख सम्बलपुर(ओडिशा) से प्राप्त अतः इतिहास…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-6 नल वंश )

Chhattisgarh history notes – About Naal Vansh इस वंश के संस्थापक शिशुक (290-330 ई.) था , परन्तु वास्तविक संस्थापक वराहराज (330-370ई.) को माना जाता है। नल वंश का शासन छत्तीसगढ़ में 5 -12 ई. तक था। इनका शासन क्षेत्र बस्तर ( कोरापुट – वर्त्तमान कांकेर ) था, तथा इनकी राजधानी पुष्करी (वर्त्तमान : भोपालपट्टनम –…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-5 राजर्षि तुल्य वंश )

Chhattisgarh history notes – about rajshree tulya vansh राजर्षि तुल्य वंश ( सुर वंश ):-  राजर्षि तुल्य वंश ने दक्षिण कोशल पर 5 वीं 6 वीं शताब्दी तक शासन किया था,इस वंश की स्थापना शुर ने की थी इसलिए इसे सुर वंश भी कहा जाता है । इनका राजचिन्ह – गजलक्ष्मी और राजधानी – आरंग…


Welcome to cgpsc.info

हमारे एंड्राइड अप्प को डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए प्ले स्टोर आइकॉन पर क्लिक करें- धन्यवाद