छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-6 नल वंश )

Chhattisgarh history notes – About Naal Vansh इस वंश के संस्थापक शिशुक (290-330 ई.) था , परन्तु वास्तविक संस्थापक वराहराज (330-370ई.) को माना जाता है। नल वंश का शासन छत्तीसगढ़ में 5 -12 ई. तक था। इनका शासन क्षेत्र बस्तर ( कोरापुट – वर्त्तमान कांकेर ) था, तथा इनकी राजधानी पुष्करी (वर्त्तमान : भोपालपट्टनम –…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-5 राजर्षि तुल्य वंश )

Chhattisgarh history notes – about rajshree tulya vansh राजर्षि तुल्य वंश ( सुर वंश ):-  राजर्षि तुल्य वंश ने दक्षिण कोशल पर 5 वीं 6 वीं शताब्दी तक शासन किया था,इस वंश की स्थापना शुर ने की थी इसलिए इसे सुर वंश भी कहा जाता है । इनका राजचिन्ह – गजलक्ष्मी और राजधानी – आरंग…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-4 गुप्तकाल काल )

chhattisgarh history notes in hindi – gupt kaal गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त (400 ई.) के दरबारी कवि हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त के दक्षिण भारत के धर्मविजय अभियान का उल्लेख है . इस अभियान के दौरान समुद्रगुप्त ने दक्षिण कोसल के शासक महेंद्र एवं महाकान्तार ( बस्तर क्षेत्र ) के शासक व्याघ्र्राज को परास्त किया…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-3 माहाजनपद काल )

chhattisgarh history notes in hindi – mahajanpad kaal माहाजनपद काल :-  ● व्हेनसांग ने 639 ई० के आसपास छत्तीसगढ़ की यात्रा की थी। उनके किताब सी.यु.की. के अनुसार गौतम बुद्ध ज्ञान प्राप्ति के बाद छ.ग. की राजधानी श्रावस्ती में आये थे और तीन माह निवासरत थे ● गौतम बुद्ध के दक्षिण यात्रा की जानकारी हमें…


छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास ( Part-2 वैदिक काल )

Chhattisgarh history notes – vaidik-kal वैदिक काल ऋग्वेद में छत्तीसगढ़ का उल्लेख नही है। शतपथ ब्राम्हण में पूर्व व पक्षिम में समुद्र का उल्लेख है। पुराणों में कन्हार नदी को रेणू नदी कहा गया है। उत्तर वैदिक काल में आर्यो का प्रवेश व प्रसार छत्तीसगढ़ में हुआ।    रामायण काल :-  इस काल में विन्ध्य…


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